रवींद्र नाथाच्या विसर्जन नाटकातले हे एक गीत…
ह्या कवितेत कवी म्हणताहेत –कोण पूर्ण पणे सामावून घेईल मला? माझे काम, दुःख, ताण, पाश सगळे तोडून मला कोण स्वतः बरोबर घेऊन जाईल?? मी माझे सर्वस्व त्याच्या मध्ये (परमेश्वरा मध्ये) विसर्जन करू इच्छितो..
আমারে কে নিবি ভাই, সঁপিতে চাই আপনারে।
আমার এই মন গলিয়ে কাজ ভুলিয়ে সঙ্গে তোদের নিয়ে যা রে॥
তোরা কোন্ রূপের হাটে চলেছিস ভবের বাটে,
পিছিয়ে আছি আমি আপন ভারে–
তোদের ওই হাসিখুশি দিবানিশি দেখে মন কেমন করে॥
আমার এই বাঁধা টুটে নিয়ে যা লুটেপুটে–
পড়ে থাক্ মনের বোঝা ঘরের দ্বারে–
যেমন ওই এক নিমেষে বন্যা এসে
ভাসিয়ে নে যায় পারাবারে॥
এত যে আনাগোনা কে আছে জানাশোনা,
কে আছে নাম ধ’রে মোর ডাকতে পারে?
যদি সে বারেক এসে দাঁড়ায় হেসে
চিনতে পারি দেখে তারে॥
हे गाणे मराठीत ..
आमारे के निबि भाई, सोंपिते चाई आपनारे …
आमार ए इ मन गलिये काज भुलिये संगे तोदेर निये जा रे ..
तोरा कोण रुपेर हाटे चलेछिस भबेर वाटे ,
पि छि ये आ छि आमि आपन भारे —
तोदेर ओई हाशी ख़ुशी दिवा निशी देखे मन केमॉन करे
आमार ए इ बांधा टूटे निये जा लुटे पुटे —
पडे थाक मनेर बोझा घरेर द्वारे —
जेमोन ओ इ एक निमिषे बन्या आशे
भाशिये ने जाय पाराबारे ..
एतो जे आना गोना के आछे जाना शोना ,
के आछे नाम धोरे मोर डाकते पारे ?
जदि शे बारेक ए शे दांडाय हेशे
चिनते पारि देखे तारे ..
ह्या कवितेचे रवींद्र नाथानी केलेले इंग्लिश रूपांतर ..
COME friend, who can free me from bonds
of toil,
for I lag behind while the pilgrims rush
to follow their vision.
Come like a sudden flood that runs with
its offerings to the sea,
Sweep me away from the load that drags
me down.
Come from among the crowd,
you, to whom I fully belong,
who can call me by my own true name
and smile and be known to me for ever.
Poems: a collection of one hundred and thirty poems, all but fifteen of which have been translated by the Poet himself. Edited by Krishna Kripalani, Amiya Chakrabarty and others.
–Rabindranath Tagore, Poems, Visva-Bharati, 1942
हे गाणे ऐकुया स्वतः रवींद्र नाथाच्या आवाजात…