सं ध्या होलो गो ओ मा ..

आज एक पूजा परजायेर गाणे ऐकुया .. ह्या गाण्यात रविंद्रनाथ संध्याकाळ चे वर्णन करताहेत. ही संध्याकाळ म्हणजे आयुष्याची पण संध्याकाळ…

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आमि कान पेते रोई ….

आज रवींद्र नाथाचे हे एक बाउल गीत ऐकुया… আমি    কান পেতে রই   ও আমার   আপন হৃদয়গহন-দ্বারে   বারে বারেকোন্‌    গোপনবাসীর কান্নাহাসির   গোপন কথা…

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तव सिंहासनेर आसन होते …

आज रवींद्र नाथाच्या गीतांजली काव्य संग्रहातील एक पूजा परजाईर गीत ऐकुया.. তব   সিংহাসনের আসন হতে এলে তুমি নেমে–মোর   বিজন ঘরের…

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कोण आलो ते प्राणेर प्रदीप …

आज हे आणखी एक पूजा परजाईर बाउल गीत ऐकुया..हे गीत आहे रवींद्र नाथाच्या गीतांजली काव्य संग्रहातील… ह्या कवितेत रवींद्रनाथ परमेश्वराला…

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भेंगे मोर घरेर चाबी ..

नूतन वर्षाभिनंदन… नवीन वर्षात आपणा सर्वांचे स्वागत…ह्या वर्षाची सुरुवात एका बाउल गाण्याने करूया… ভেঙে মোর     ঘরের চাবি     নিয়ে যাবি      কে আমারে            …

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नील आकाशेर कोने कोने …

रवींद्र नाथाचे हे एक प्रकृती (निसर्ग) परजायेर गीत आज ऐकुया… নীল আকাশের কোণে কোণে ওই বুঝি আজ শিহর লাগে,   আহা।শাল-পিয়ালের…

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तुमि एकटु केवल …

आज रवींद्र नाथाच्या गीतांजली काव्य संग्रहातील गाणे ऐकुया… तुमि एकटु केवल बोशते दिओ काछे .. ह्या गाण्यात कवी परमेश्वराला उद्देशून…

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