ह्या ८ मे ला रवींद्र जयंती साजरी झाली..बांग्ला कॅलेंडर नुसार हि तारीख असते २५ वैशाख.. पश्चिम बंगाल मध्य हा दिवस पचिशे बोईशाख म्हणून ओळखला जातो आणि सर्वत्र रवींद्र नाथांचा जन्मदिवस साजरा होतो..लहाना पासून थोरा पर्यंत सर्व जण रवींद्र नाथानी रचलेल्या कविता, गाणी, नाटक, नाच आयोजन करतात..बंगाल मध्ये रवींद्र नाथाना सर्व जण “आमादेर रोबि ठाकूर” (आमचे रवी ठाकूर ) म्हणूनच संबोधतात…आणि घरोघरी त्यांचे साहित्य विचार जोपासले जातात..
१९४१ मध्ये शांतिनिकेतन मध्ये रवींद्र नाथांचा जन्म दिन साजरा करायचे ठरले..त्या वेळी त्यांनी हि कविता रचली..हे नूतन…
হে নূতন,
দেখা দিক আর-বার জন্মের প্রথম শুভক্ষণ॥
তোমার প্রকাশ হোক কুহেলিকা করি উদঘাটন
সূর্যের মতন।
রিক্ততার বক্ষ ভেদি আপনারে করো উন্মোচন।
ব্যক্ত হোক জীবনের জয়,
ব্যক্ত হোক তোমামাঝে অসীমের চিরবিস্ময়।
উদয়দিগন্তে শঙ্খ বাজে, মোর চিত্তমাঝে
চিরনূতনেরে দিল ডাক
পঁচিশে বৈশাখ॥
हि कविता .मराठीत..
हे नूतन,
देखा दिक आर बार जन्मेर प्रथम शुभ ख ण …
( देखा दिक – दिसू दे, शुभ ख ण – शुभ क्षण ..)
तोमार प्रकाश होक कुहेलिका करि उदघाटन
(होक – होऊ देत.., कुहेलिका – धुके ..)
सुरजेर मोतोन …
( सुरजेर मोतोन – सुर्य प्रमाणे…)
रिक्त तार बख भेदि आपनारे करो उन्मोचन ..
(बख्ख – वक्ष , भेदि – भेदणे, )
व्यक्त होक जीवनेर जय,
व्यक्त होक तोमा माझे असीमेर चिर विस्मय ..
उदय दिगंते शंख बाजे , मोर चित्त माझे
चिरनूतनेरे दिलो डाक..
पचीशे बोईशाख….
ह्या गाण्याचा एका अनामिकाने केलेला इंग्लिश अनुवाद…
HAIL the new, Hail the new,
Let the sacred hour of birth approach once more.
May you appear in glory, unveiled from mist
as does the sun.
Reveal yourself from the emptiness of the soul.
Let life be victorious once more,
Let the wonder of the infinite be revealed through your creation.
Conch shells sound in celebration in the dawn skies within my soul.
The call goes out for eternal renewal
from this twenty fifth day of Boishakh.
रवींद्र जयंती ला हे गाणे नेहमीच गायले जाते..हे गाणे ऐकुया इंद्राणी सेन ह्यांच्या स्वरात…