आणखी एक पावसाळी गीत…दिवस भर पाऊस पडतोय आणि त्यामुळे कवीचे मन कुठेच लागत नाहीय..ती मनाची अस्थिरता ह्या गाण्यात दिसते..
আজি ঝরো ঝরো মুখর বাদরদিনে
জানি নে, জানি নে কিছুতে কেন যে মন লাগে না॥
এই চঞ্চল সজল পবন-বেগে উদ্ভ্রান্ত মেঘে মন চায়
মন চায় ওই বলাকার পথখানি নিতে চিনে॥
মেঘমল্লারে সারা দিনমান
বাজে ঝরনার গান।
মন হারাবার আজি বেলা, পথ ভুলিবার খেলা–মন চায়
মন চায় হৃদয় জড়াতে কার চিরঋণে॥
हेच गाणे मराठीत —
आजि झ रो झ रो मूखर बा दर दिने
(धुवाधार कोसळणारा हा पाऊस [आणि] )
जा नि ने , जा नि ने कि छू ते केनो जे मन लागेना ..
([कळेना का] कशातच लागेना मन माझे )
ए इ चंचल सजल पवन वेगे उद्भ्रान्त मेघे मन चाय ..
(ह्या सजल वाऱ्यासोबत व्हावे मेघावर स्वार )
मन चाय ओई बलाकार पथ खानि निते चिने …
(शोधावा (उडणाऱ्या) बगळ्याचा मार्ग )
मेघ मल्लारें सारा दिन मान
(सारा दिन मेघ मल्हारच्या सुरात )
बाजे झरनार गान …
(बाजे वर्षा गीत )
मन हा रा बा र आजि बेला , पथ भूलि बा र खेला मन चाय
(हरवून जाण्याची हि वेळ आणि चुकावा रस्ता )
मन चाय हृदय जडाते कार चीर ऋणे …
(जडावा चिरकालीन स्नेह …)
रवींद्र नाथाचे हे गाणे ‘शं ख बेला” ह्या चित्रपटा त वापरले आहे..उत्तम कुमार आणि माधोबी मूखर्जी यांचा सहज सुंदर अभिनय आणि गायले आहे आरती मुखर्जी यांनी …शंख बेला म्हणजे संध्याकाळ.. ..बांगला संस्कृति मध्ये, संध्याकाळी पूजा किंवा दिवेलागण केल्यावर शंख वाजवतात..ती वेळ म्हणजे शंखवेळ ..