आजि प्रणोमि तोमारे …

नूतनवर्षाभिनंदन!!!

ह्या वर्षाची सुरुवात करूया रवींद्र नाथानी रचलेल्या एका प्रार्थनेने ..एक ब्राम्हो संगीत ..

আজি   প্রণমি তোমারে চলিব, নাথ, সংসারকাজে।
তুমি   আমার নয়নে নয়ন রেখো অন্তরমাঝে॥
হৃদয়দেবতা রয়েছ প্রাণে   মন যেন তাহা নিয়ত জানে,
    পাপের চিন্তা মরে যেন দহি দুঃসহ লাজে॥
সব কলরবে সারা দিনমান   শুনি অনাদি সঙ্গীতগান,
    সবার সঙ্গে যেন অবিরত তোমার সঙ্গ রাজে।
নিমেষে নিমেষে নয়নে বচনে,   সকল কর্মে, সকল মননে,
    সকল হৃদয়তন্ত্রে যেন মঙ্গল বাজে॥

हि कविता मराठीत..

आजि प्र णो मि तोमारे चलिबो, नाथ, संसार काजे ..

(हे प्रभूं, तुला माझे शतशः प्रणाम..)

तुमि आमार नयने नयन रेखो अंतर माझे …

(तुझी कृपा दृष्टी सतत माझ्यावर राहू दे…)

हृदय देवता रोयेछे प्राणे मन जेनो ताहा नियत जाने,

(तुझा वास निरंतर राहू दे माझ्या हृदयी..)

पापेर चिंता मरे जेनो दहि दुःसह लाजे ..

(नको माझ्या मनी पाप विचार …)

सब कलरबे सारा दिनमान शुनि अनादी संगीतगान,

(दिवसरात्र ऐकू दे तुझे गाणे…)

सबार संगे जेनो अविरत तोमार संग राजे ..

(तुझा सहवास निरंतर लाभू दे...)

निमेषे निमेषे नयने वचने, सकल कर्म , सकल मनने,

(क्षणो क्षणी, सर्व कर्म , सर्व विचारात ..)

सकल हृदयतंत्रे जेनो मंगल बाजे…

(सर्वत्र मंगल विराजू दे.…)

ह्या प्रार्थेनेचे रवींद्र नाथानी केलेला इंग्लिश अनुवाद..

I HAVE come to thee to take thy touch before I begin my day.
  Let thy eyes rest upon my eyes for awhile.
  Let me take to my work the assurance of thy comradeship, my friend.
  Fill my mind with thy music to last through the desert of noise!
  Let thy Love’s sunshine kiss the peaks of my thoughts and linger in my life’s valley where the harvest ripens.  

— Rabindranath Tagore, Lover’s Gift and Crossing, Macmillan, London, 1918.  

हि प्रार्थना ऐकुया सागर सेन ह्यांच्या स्वरात…

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