नवीन वर्षाच्या हार्दिक शुभेच्छा…
आज ऐकुया एक ब्रम्ह संगीत..
আমারে করো তোমার বীণা, লহো গো লহো তুলে।
উঠিবে বাজি তন্ত্রীরাজি মোহন অঙ্গুলে॥
কোমল তব কমলকরে, পরশ করো পরান-‘পরে,
উঠিবে হিয়া গুঞ্জরিয়া তব শ্রবণমূলে॥
কখনো সুখে কখনো দুখে কাঁদিবে চাহি তোমার মুখে,
চরণে পড়ি রবে নীরবে রহিবে যবে ভুলে।
কেহ না জানে কী নব তানে উঠিবে গীত শূন্য-পানে,
আনন্দের বারতা যাবে অনন্তের কূলে॥
हे गाणे मराठीत…
आमारे करो तोमार बीना, लहो गो लहो तुले ..
(लहो तुले – उचलून घेणे.…)
उठिबे बाजि तंत्रीराजि मोहन अंगुले ..
कोमल तब कमलकरे, परश करो प रा ण – परे ,
(परश – स्पर्श ..पराण – प्राण ..)
उठिबे हिया गुंजरिया तब श्रवण मुले ..
कखोनो सुखे कखोनो दुःखे कांदिबे चाहि तोमार मुखे,
चरणे पडी रबे नीरबे रहीबे जबे भुले ..
केह ना जाने कि नब ताने उठिबे गीत शून्य-पाने,
आनंदेर बारता जाबे अनंतेर कुले …
(बारता – वार्ता ..)
नागेंद्र नाथ गुप्त ह्यांनी केलेला ह्या कवितेचा इंग्लिश अनुवाद..
The Harp
MAKE me your harp, lift, oh, lift me up!
The strings will make music under your dainty fingers;
Touch my soul with your soft lotus hand,
My heart will murmur tunefully in your ears.
Now in happiness, again in sorrow
It will look at your face and weep,
And lie silent at your feet when you forget.
No one knows to what new tune
The song will soar to heaven,
The tidings of joy will pass to the shore of the infinite.
–Nagendranath Gupta, Sheaves, Indian Press, Allahabad, 1929
हे गाणे ऐकुया श्रीमती सुचित्रा मित्र ह्यांच्या आवाजात…