शे जे पाशे एशे बोशेछिलो …

हि रवींद्र नाथाच्या गीतांजली काव्य संग्रहातील एक कविता..

সে যে   পাশে এসে বসেছিল,   তবু জাগি নি।
কী ঘুম তোরে পেয়েছিল   হতভাগিনি॥
      এসেছিল নীরব রাতে,   বীণাখানি ছিল হাতে–
      স্বপন-মাঝে বাজিয়ে গেল   গভীর রাগিণী॥
জেগে দেখি দখিন-হাওয়া,   পাগল করিয়া
গন্ধ তাহার ভেসে বেড়ায়   আঁধার ভরিয়া।
      কেন আমার রজনী যায়,   কাছে পেয়ে কাছে না পায়–
      কেন গো তার মালার পরশ   বুকে লাগে নি॥

हि कविता मराठीत…

शे जे पाशे ए शे बोशेछिलो, तबु जागि नि …

(तो जवळ येऊन बसला होता..पण मला जाग नाही आली…..)

की घूम तोर पेयेंछिलो हतभगिनी…

(अशी कशी दुर्दैवी झोप मला लागली.. घूम – झोप …)

एशेछिलो नीरब राते, वीणा खाणी छिलो हाते —

(शांत रात्री तो आला होता…हातात होती वीणा…)

स्वपन माझे बाजिये गेलो गंभीर रागिणी ..

(स्वप्नातच झंकारून गेली एक गंभीर रागिणी…..)

जेगे देखी दखिन -हवा, पागल कोरिया..

(उठून बघतो तर वारा वाहतोय वेड्या सारखा….)

गंध ताहार भेशे बेडाय अंधार भरिया …

(त्याच्या अस्तित्वाचा सुवास भरून राहिलाय ह्या अंधारात...)

केनो आमार रजनी जाय , काछे पेये काछे ना पाय —

(का माझी रात्र अशी व्यर्थ चाललेय.? जवळ येऊन पण दर्शन नाही झाले…)

केनो गो तार मालार परश बुके लागे नि …

(का त्याच्या पुष्प माळेचा स्पर्श माझ्या हृदयी नाही झाला???)

ह्या कवितेचा इंग्रजी अनुवाद…

HE came and sat by my side but I woke not. What a cursed sleep it was, O miserable me!
He came when the night was still; he had his harp in his hands, and my dreams became resonant with its melodies.
Alas, why are my nights all thus lost? Ah, why do I ever miss his sight whose breath touches my sleep?

     –Gitanjali (Song Offerings) by Rabindranath Tagore

हे गाणे ऐकुया श्री द्विजेंन मुखोपाध्याय ह्यांच्या आवाजात…

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