आज संध्याकाळ पासून पुन्हा पाऊस सुरु झालाय..हे रवींद्र नाथाचे आणखी एक पाऊस गाणे पाहूया..
এসো গো, জ্বেলে দিয়ে যাও প্রদীপখানি
বিজন ঘরের কোণে, এসো গো।
নামিল শ্রাবণসন্ধ্যা, কালো ছায়া ঘনায় বনে বনে॥
আনো বিস্ময় মম নিভৃত প্রতীক্ষায় যূথীমালিকার মৃদু গন্ধে–
নীলবসন-অঞ্চল-ছায়া
সুখরজনী-সম মেলুক মনে॥
হারিয়ে গেছে মোর বাঁশি,
আমি কোন্ সুরে ডাকি তোমারে।
পথে চেয়ে-থাকা মোর দৃষ্টিখানি
শুনিতে পাও কি তাহার বাণী–
কম্পিত বক্ষের পরশ মেলে কি সজল সমীরণে॥
हि कविता मराठीत…
एशो गो, ज्वेले दिये जाओ प्रदीप खानि
(ये ना ..दीप प्रज्वलित कर..)
विजन घरेर कोने, एशो गो…
(ह्या निर्जन घरात …ये ना…)
नामिलो श्रावण संध्या, कालो छाया घनाय बने बने ..
(हि श्रावणातील संध्याकाळ…जंगलात दाटलेले काळे मेघ…)
आनो विस्मय मम निभृत प्रतिखाय जुथी मालिकार मृदू गंधे —
(माझी हि प्रतीक्षा समाप्त होऊ देत तुझ्या अकल्पित आगमनाने जणू काही अकस्मात येणारा जुई चा सुगंध)
नील बशन -अंचल – छाया
(तुझ्या नील कोमल छायेने ..)
सुख रजनी -सम मेलुक मने ..
(हि रात्र शीतल होऊ देत…)
हारिये गेछे मोर बांशि,
(हरवलिय माझी बांसरी ..)
आमि कोन सुरे डा कि तोमारे …
(कोणत्या सुरात मी बोलावू तुला…)
पथे चेये थाका मोर दृष्टी खानि
(तुझी वाट पाहणारी माझी दृष्टी..)
शुनिते पाओ कि ताहार वाणी —
(तिची हाक तुला ऐकू येतेय का?…)
कंपित बखेर परश मेले कि सजल समीरणे …
(कंपित श्वास ह्या सजल वाऱ्यात मिसळून जाऊ देत…बख – वक्ष ..परश – स्पर्श ..)
मरियन चट्टेर्जी ह्यांनी केलेले ह्या गीताचे इंग्लिश रूपांतर ……
COME my beloved, light your lamp and wait for me in the corner of your empty house, come dear.
The monsoon evening has fallen, and heavy shadows darken the forest.
Bring surprise to my lonely vigil with the soft fragrance of your jasmine garland.
Let the azure shadows of your garment embrace my mind like this blissful night.
Come my beloved.
My flute has gotten lost, in which melody shall I call you?
My sight stays fixed on the road, can you hear its message?
Does the touch of your trembling breast mingle with the wet wind?
–Marian Chatterjee, unpublished manuscript, Feb 2016
हे गाणे ऐकुया इंद्राणी सेन ह्यांच्या आवाजात…