ओलो शोई, ओलो शोई….

एकदा रवींद्र नाथाच्या पत्नी मृणालिनी देवी ह्या त्यांची मैत्रिणी (अमला दास ) बरोबर दिल खुलास गप्पा मारत होत्या..दोघींचे हितगुज आणि हास्य विनोद बराच वेळ चालू होते..रवींद्र नाथानी ह्या प्रसंगावर हे गाणे रचले..(संदर्भ : सहाना देवी, कविर संस्पर्शे , रबिन्द्रायण , २य खंड ).

 ওলো সই, ওলো সই,
আমার   ইচ্ছা করে তোদের মতন মনের কথা কই।
    ছড়িয়ে দিয়ে পা দুখানি   কোণে বসে কানাকানি।
          কভু হেসে কভু কেঁদে চেয়ে বসে রই॥
            ওলো সই, ওলো সই,
    তোদের আছে মনের কথা, আমার আছে কই।
আমি   কী বলিব, কার কথা,   কোন্‌ সুখ, কোন্‌ ব্যথা–
          নাই কথা, তবু সাধ শত কথা কই॥
            ওলো সই, ওলো সই,
তোদের   এত কী বলিবার আছে ভেবে অবাক হই।
আমি   একা বসি সন্ধ্যা হলে   আপনি ভাসি নয়নজলে,
         কারণ কেহ শুধাইলে নীরব হয়ে রই॥

हे गाणे मराठीत…

ओलो सई, ओलो सई,

(हे सखी,..)

आमार इच्छा करे तोदेर मोतोन मनेर कथा कई …

(मला पण वाटते तुझ्या सारखे च कुणाशी तरी मन मोकळे बोलावे..)

छडिये दिये पा दु खा नि कोने बसे काना का नि …

(छान पैकी दोन पाय पसरून बसावे आणि हितगुज करावे..)

कभू हेशे कभू केंदे चे ये बशे रोई ..

(कधी हसू तर कधी आसू असावेत…)

ओलो सई, ओलो सई,

(हे सखी…)

तोदेर आछे मनेर कथा , आमार आछे कोई ..

(किती ह्या तुमच्या गुजगोष्टी ……)

आमि कि बोलिबो, कार कथा, कोन सुख, कोन व्यथा —

(पण मी काय बोलणार—कुठले सुख आणि कुठली व्यथा..)

नाई कथा, तबू साध शतो कथा कोई …

(नाही बोलत काही ..तरी मन किती तरी गोष्टी बोलत राहते…)

ओलो सई, ओलो सई,

( हे सखी,)

तोदेर अतो की बोलीबार आछे भेबे अवाक होई..

(इतके काय बोलताय तुम्ही, मला आश्चर्य वाटते..)

आमि एका बोशी संध्या होले आप नि भाषि नयन जले,

(मी एकटाच असतो संध्याकाळी..आणि डोळे पाण्याने भरलेले..)

कारण केहा शु धा इ ले निरब होये रोई …..

(कुणी कारण विचारले कि मी आणखीनच निशब्द होऊन जातो…)

The Fugitive ह्या काव्य संग्रहात रवींद्र नाथानी केलेला ह्या कवितेचा इंग्रजी अनुवाद…

FRIEND, I wish I had some secret of my own, like unshed rain in summer clouds,-some secret which I could whisper to someone and carry folded in my silence.    

I envy you, when your muffled talk spreads an undertone of sadness III the noon by the slow water under the trees dozing in the sun,

And when, in the evening, which seems hushed at the sound of an unseen step, you ask me for the cause of my tears, I do not know how to answer you, for my secret is a secret unto me.

–Rabindranath Tagore, The Fugitive, MacMillan, London 1921  

हे गाणे ऐकुया श्रावणी सेन आणि इंद्राणी सेन ह्या दोन बहिणींच्या आवाजात—

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