ओ जे माने ना माना …

आज एक प्रेम गीत पाहूया..रवींद्र नाथाची हि छोटीशी रचना..निरोप घ्यायची वेळ झाली आहे परंतु कवींना कुणी तरी जाऊ देत नाहीय…

ও যে মানে না মানা।
     আঁখি ফিরাইলে বলে, ‘ না, না, না।’
যত বলি ‘নাই রাতি– মলিন হয়েছে বাতি’
     মুখপানে চেয়ে বলে, ‘না, না, না।’
     বিধুর বিকল হয়ে খেপা পবনে
     ফাগুন করিছে হা-হা ফুলের বনে।
আমি যত বলি ‘তবে      এবার যে যেতে হবে’
     দুয়ারে দাঁড়ায়ে বলে, ‘না, না, না।’

हि कविता मराठीत..

ओ जे माने ना माना ..

(ती ऐकतच नाही काही..)

आखि फिराईले बोले, ‘ना, ना, ना..’

(निरोप घेतला कि म्हणते , ‘ ना , ना, ना..’)

जतो बोलि ‘नाई राति — मलिन होयेछे बा ति ‘

(किती समजावले , ‘नाही रात्र आता, विझले दीप…’)

मुख पाने चे ये बोले, ‘ना, ना, ना..’

(आर्जवाने सांगते , ‘ना, ना, ना…’)

विधूर विकल होये खेपा पवने

(हताश , वेड्यासारखा वाहणारा वारा …खेपा – वेडा ..)

फागुन कोरिछे हा-हा फुलेऱ बने ..

(आणि फाल्गुनातील हि फुल राशी..)

आमि जतो बोलि ‘तबे एबार जे जेते होबे’

(मी समजावतो , ‘आता जायला हवे’…)

दुवारे दा डा ये बोले, ‘ना, ना, ना..’

(दारी उभारून म्हणतें , ‘ ना, ना, ना…‘)

ह्या गाण्याचा रवींद्र नाथानी केलेला इंग्लिश अनुवाद..

SHE will have no denial.
When I turn to go she cries, “No, no, ah no !”
  “I cannot tarry,” I say.
  She looks up to my face and cries, “No, no, ah no !”
  The March wind is wild among the leaves.
  I say to her, “It is late.”
  She stands at the door and cries, “No, no, ah
no !” 

—- Rabindranath Tagore, “Ingareji Rupantar”, Rabindra Beeksaa, vol. 17, Rabindra-Bhavan, Aug 1987 

हे गाणे ऐकुया श्रावणी सेन ह्यांच्या आवाजात…

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.