आता होळीचे वेध लागलेत..होळी ला बांगला भाषेत ‘दो ल’ म्हणतात.. होळी पौर्णिमा “दो ल पौर्णिमा” किंवा “दो ल जात्रा” म्हणून ओळखली जाते..ह्या दिवशी शांतिनिकेतन मध्ये वसंतोत्सव साजरा होतो.. लाल, पिवळ्या आणि हिरव्या रंगांच्या पारंपरिक वेष भुषेत सर्व मुले मुली नाच गाण्याच्या तालावर रंग खेळतात..सर्व गाणी रवींद्र नाथानी रचलेली आणि नाच पण रवींद्र नाथांचाच अविष्कार रवींद्र नृत्य..हि नृत्य रचना मणिपुरी नृत्याशी मिळती जुळती आहे..
प्रति वर्षी, वसंतोत्सवाची सुरवात ह्या रवींद्र गीताने होते.. ओ रे गृहवासी..
ওরে গৃহবাসী খোল্,দ্বার খোল্, লাগল যে দোল।
স্থলে জলে বনতলে লাগল যে দোল।
দ্বার খোল্, দ্বার খোল্॥
রাঙা হাসি রাশি রাশি অশোকে পলাশে,
রাঙা নেশা মেঘে মেশা প্রভাত-আকাশে,
নবীন পাতায় লাগে রাঙা হিল্লোল।
দ্বার খোল্, দ্বার খোল্॥
বেণুবন মর্মরে দখিন বাতাসে,
প্রজাপতি দোলে ঘাসে ঘাসে।
মউমাছি ফিরে যাচি ফুলের দখিনা,
পাখায় বাজায় তার ভিখারির বীণা,
মাধবীবিতানে বায়ু গন্ধে বিভোল।
দ্বার খোল্, দ্বার খোল্॥
हे गाणे मराठीत…
ओ रे गृहवासी, खोल , द्वार खोल, लागलो जे दोल ..
( द्वार खोल – दार उघड..)
स्थले जले बन तले लागलो जे दो ल ..
द्वार खोल, द्वार खोल..
रांगा हा शि राशि राशि अशोके प ला शे ,
( रांगा – रंगवलेले ..रंगीन, हा शि – हसू )
रांगा नशा मेघे मेशा प्रभात – आकाशें ,
(मेशा – मिसळून ..)
नवीन पाताय लागे रांगा हिल्लोळ ..
द्वार खोल, द्वार खोल..
वेणूवन मर्मरे दखिन वाताशे ,
( दखिन वाताशे – दक्षिणेकडून वाहणारा वारा ..)
प्रजापती डोले घासे घासे ..
( प्रजापती – फुलपाखरू..)
मौमाछी फिरे जाचि फुलेर द खि ना ,
( मौमाछी – मधमाशी , जाचि – याचना , द खि ना – दक्षिणा )
पाखाय बाजाय तार भिकारी र वीणा,
(पाखा – पंख )
माधवी वि ता ने वायू गंधे विभोल..
द्वार खोल, द्वार खोल..
कुणी अनामिकाने केलेलं इंग्लिश रूपांतर पण इथे देत आहे…
A LL those who remain pent
and cooped up in their homes,
There is a call abroad :
Open wide your doors
— it says.
There is a swing in the air,
in the land, in the water
and in the forest-glades.
Together they call:
Open wide your doors.
Spring flowers laugh
until they are red in the face.
Clouds at early dawn
look divinely drunk in a crimson haze.
New-sprouted leaves
are a purple wave in a green sea.
The bamboo-grove sets up a murmur
in the southern breeze.
Butterflies flit about from grass to grass.
The honey-bee hovers around
begging of the flowers their boon
and hums its wings in a monotone.
Yonder in the grove,
redolent with fragrant flowers,
the wind says:
Open wide your doors.
हे गाणे इथे ऐकुया श्रावणी सेन ह्यांच्या आवाजात..