हि कविता रवींद्र नाथानी लहान मुलांसाठी लिहिलेय.. पावसाची कविता.. ती एका छडा वर बेतलेली आहे.. छडा म्हणजे बडबडगीत.. मूळ छडा असा आहे –
ब्रिष्टी पोडे टापूर टूपूर…
(पाऊस पडतोय टीप टीप..)
नदेय एलो बान
(नदीला आलाय पूर..)
शिब ठाकुरेर बीये हॉबे
(महादेवाचे लग्न आहे..बिये – लग्न ..)
तीन टे कन्ने दान..
(तीन कन्या दान..)
एक कन्ने राधेन वाढेन ..
(एक कन्या रांधतेय…)
एक कन्ने खान ..
(एक कन्या जेवतेय..)
एक कन्ने गोसा कोरे
(एक कन्या घुंघट ओढून .. गोसा – घुंघट )
बापेर बाडी जान…
(माहेरी जातेय..)
[ बंगाली लोककथेत असे मानतात कि महादेवाने तीन मुलींशी लग्न केले – गंगा, पार्वती आणि काली..)
अशा ह्या मजेशीर बडबडगीतांवर रवींद्र नाथानी हि कविता रचलेय —
দিনের আলো নিবে এল,
সুয্যি ডোবে – ডোবে।
আকাশ ঘিরে মেঘ জুটেছে
চাঁদের লোভে লোভে।
মেঘের উপর মেঘ করেছে—
রঙের উপর রঙ,
মন্দিরেতে কাঁসর ঘন্টা।
বাজল ঠঙ ঠঙ।
ও পারেতে বিষ্টি এল,
ঝাপসা গাছপালা।
এ পারেতে মেঘের মাথায়
একশো মানিক জ্বালা।
বাদলা হাওয়ায় মনে পড়ে
ছেলেবেলার গান—
‘বিষ্টি পড়ে টাপুর টুপুর,
নদেয় এল বান।’
আকাশ জুড়ে মেঘের খেলা,
কোথায় বা সীমানা!
দেশে দেশে খেলে বেড়ায়,
কেউ করে না মানা।
কত নতুন ফুলের বনে
বিষ্টি দিয়ে যায়,
পলে পলে নতুন খেলা
কোথায় ভেবে পায়।
মেঘের খেলা দেখে কত
খেলা পড়ে মনে,
কত দিনের নুকোচুরি
কত ঘরের কোণে।
তারি সঙ্গে মনে পড়ে
ছেলেবেলার গান—
‘বিষ্টি পড়ে টাপুর টুপুর,
নদেয় এল বান।’
মনে পড়ে ঘরটি আলো
মায়ের হাসিমুখ,
মনে পড়ে মেঘের ডাকে
গুরুগুরু বুক।
বিছানাটির একটি পাশে
ঘুমিয়ে আছে খোকা,
মায়ের ’পরে দৌরাত্মি সে
না যায় লেখাজোখা।
ঘরেতে দুরন্ত ছেলে
করে দাপাদাপি,
বাইরেতে মেঘ ডেকে ওঠে—
সৃষ্টি ওঠে কাঁপি।
মনে পড়ে মায়ের মুখে
শুনেছিলেম গান—
‘বিষ্টি পড়ে টাপুর টুপুর,
নদেয় এল বান।
মনে পড়ে সুয়োরানী
দুয়োরানীর কথা,
মনে পড়ে অভিমানী
কঙ্কাবতীর ব্যথা।
মনে পড়ে ঘরের কোণে
মিটিমিটি আলো,
একটা দিকের দেয়ালেতে
ছায়া কালো কালো।
বাইরে কেবল জলের শব্দ
ঝুপ্ ঝুপ্ ঝুপ্—
দস্যি ছেলে গল্প শোনে
একেবারে চুপ।
তারি সঙ্গে মনে পড়ে
মেঘলা দিনের গান—
‘বিষ্টি পড়ে টাপুর টুপুর,
নদেয় এল বান।’
কবে বিষ্টি পড়েছিল,
বান এল সে কোথা।
শিবঠাকুরের বিয়ে হল,
কবেকার সে কথা।
সেদিনও কি এম্নিতরো
মেঘের ঘটাখানা।
থেকে থেকে বাজ বিজুলি
দিচ্ছিল কি হানা।
তিন কন্যে বিয়ে ক’রে
কী হল তার শেষে।
না জানি কোন্ নদীর ধারে,
না জানি কোন্ দেশে,
কোন্ ছেলেরে ঘুম পাড়াতে
কে গাহিল গান—
‘বিষ্টি পড়ে টাপুর টুপুর,
নদেয় এল বান।’
हि कविता मराठीत —
दिनेर आलो निभे एलो, सूरजि डोबे डोबे ..
(सांज होत आलेय, सूर्य मावळतीला...)
आकाश घिरे मेघ जुटे छे चांदेर लोभे लोभे —
मेघेर ऑपोर मेघ कोरेछे — रंगेर ऑपोर रंग —
मंदिरेते काशेर घंटा बाजलो ढंग ढंग —
(काशेर घंटा – पितळी घंटा, बाजलो – वाजतेय..)
ओ पारेते ब्रिष्टी एलो , झापशा गाछ पाला ..
(त्या किनारी पाऊस पडतोय, अंधुक झाडी झुडुपे ..गाछ पाला – झाड )
ए पारेते मेघेर माथाय एकशॉ माणिक ज्वाला..
(ए पारेते – ह्या किनारी , एकशॉ माणिक ज्वाला – शंभर हिऱ्याचा प्रकाश...)
बादला हवाय मनें पोडे छेले बेलार गान —
(पावसाळी हवेत आठवते बाल पणीचे गाणे , छेले बेला – बाल पण )
ब्रिष्टी पोडे टापूर टूपूर, नदेय एलो बान..
(पाऊस पडतोय रिम झिम , नदीला आलाय पुर ..)
आकाश जुडे मेघेर खेला कोथाय ना सीमाना ..
(आकाश भरून ढगांचा खेळ ..कुठं नाही जागा..)
देशे देशे खेले बेडाय, केउ कोरे ना माना ..
(देशोदेशी (हे मेघ) फिरत राहतात कुणी नाही अडवत…)
कतो नोतून फुलेऱ बने ब्रिष्टी दिये जाय ..
(किती नवीन फुलांना पाऊस देऊन जातात..)
पले पले नोतून खेला कोथाय भेंबे पाय ..
(प्रत्येक वेळी नवीन खेळ कसा काय सुचतो ह्या ढगांना…)
मेघेर खेला देखे कतो खेला पोडे मने ..
(त्यांचा खेळ बघून किती काही आठवते…)
कतो दिनेर नुकोचुरी कतो घरेर कोने ..
(किती वेळा खेळली लपाछपी. अनेक घरामध्य ….नुकोचुरी – लपाछपी ..)
तारी संगे मने पोडे छेलबेलार गान —
(त्या बरोबर आठवतेय लहानपणी चे गाणे ..मने पोडे – आठवतेय ..)
ब्रिष्टी पोडे टापूर टूपूर, नदेय एलो बान..
(रिमझिम पडतोय पाऊस नदीला आलाय पूर ..)
मने पोडे घरटी आलो , मायेर हाशी मुख ..
(आठवतो तो घरातला दिवा..आईचा हसरा चेहरा...)
मने पोडे मेघेर डाके गुरु गुरु बूक ..
(आठवतेय गडगडाटाने धडधडणारे हृदय..बुक – हृदय, छाती..)
बिछानाटीर एकटी पाशे घुमीये आछे खोका ..
(बिछान्यावर एका बाजूला झोपलेय लहान बाळ..खोका – बाळ, मुलगा..)
मायेर पोरे दौरात्मि शे जाय ना लेखा जोखा ..
(आई बरोबर त्याचा सतत खोडकर पणा )
घरेते दुरन्त छेले कोरे दा पा दापि ..
(घरात खोडकर मुलगा अजूनही करतोय खोड्या..)
बाहिरेते मेघ डेके ओठे — सृष्टी ओठे कांपि ..
(बाहेर गडगडण्याने सृष्टी होतेय कंपित...)
मोने पोडे मायेर मुखे सुने छिलेम गान…
(आठवतेय आईने गायलेले गाणे ..)
ब्रिष्टी पोडे टापूर टूपूर, नदेय एलो बान..
(रिमझिम पडतोय पाऊस नदीला आलाय पूर .)
मने पोडे सुओरानी दुऑ राणी र कथा
(आठवतेय आवडती आणि नावडत्या राणीची गोष्ट..)
मने पोडे अभिमानी कंकावतीर व्यथा ..
(आठवतेय कंका व तीचे दुःख ..)
मने पोडे घरेर कोने मिटी मिटी आलो ..
(आठवतेय एका कोपऱ्यात मिणमिणता दिवा…)
एकटा दिकेर देवालेते छाया कालो कालो ..
(एका बाजूच्या भिंती वरील सावली काळी काळी …)
बाहिरे केवळ ज़लेर शब्द झूप झूप झूप …
(बाहेर फक्त पाण्याचा आवाज झूप झूप झूप…)
दस्यी छेले गल्प शूने एकेबारे चूप ..
(खट्याळ बाळ गोष्ट ऐकून एकदम चूप...)
तारि संगें मने पोडे मेघला दिनेर गान …
(त्या बरोबर आठवतेय पावसाचे हे गीत…)
ब्रिष्टी पोडे टापूर टूपूर, नदेय एलो बान..
(रिमझिम पडतोय पाऊस नदीला आलाय पूर .)
कोबे ब्रिष्टी पोडे छिलो ..बान एलो शे कोथा …
(कधी पाऊस पडला होता कुठे आला तो पूर ..)
शिब ठाकुरेर बिये होलो, कोबेकार शे कथा ..
(महादेवाचे लग्न झाले किती जुनी कथा...)
शे दिन ओ कि एमनीतरो , मेघेर घटा खाना …
(त्यावेळी पण असाच पडत होता का पाऊस...)
थेके थेके बाज बिजली दिच्छिलो कि हाना ..
(चमकत होती का वीज आणि गर्जत होते मेघ…)
तीन कन्ये बिये कोरे कि हॉलो तार शेषे …
(तीन मुलीशी लग्न करून काय झाले त्याचे शेवटी???)
ना जानी कोन नदीर धारे .. ना जानी कोन देशे ..
(नाही माहित कोणत्या नदी किनारी आणि कुठल्या देशात.. )
कोन छेलेर घूम पा डा ते के गाहीलो गान —
(कुठल्या आईने प्रथम गायले हे अंगाई गीत…)
ब्रिष्टी पोडे टापूर टूपूर, नदेय एलो बान..
(रिमझिम पडतोय पाऊस नदीला आलाय पूर .)
कविता वाचनाला बांगला भाषेत आब्रित्ति म्हणतात..ह्या कवितेची आब्रित्ती ऐकुया श्रीमती प्रणोती ठाकूर ह्यांच्या आवाजात..