शैलजा रंजन मुजुमदार ह्यांनी आपल्या ‘यात्रा पथेर आनंद गान’ ह्या स्मरण ग्रंथात लिहिलेय ..त्या दिवशी पण असाच पाऊस होता..मेघ दाटून आले होते..असा जोरदार वारा की सगळे काही उडवून लावेल..त्या वेळी गुरु देवांनी हे गाणे रचले ..मन मोर मेघेर संगी..
মন মোর মেঘের সঙ্গী,
উড়ে চলে দিগ্দিগন্তের পানে
নি:সীম শূন্যে শ্রাবণবর্ষণসঙ্গীতে
রিমিঝিম রিমিঝিম রিমিঝিম॥
মন মোর হংসবলাকার পাখায় যায় উড়ে
ক্বচিৎ ক্বচিৎ চকিত তড়িত-আলোকে।
ঝঞ্ঝনমঞ্জীর বাজায় ঝঞ্ঝা রুদ্র আনন্দে।
কলো কলো কলমন্দ্রে নির্ঝরিণী
ডাক দেয় প্রলয়-আহবানে॥
বায়ু বহে পূর্বসমুদ্র হতে
উচ্ছল ছলো ছলো তটিনীতরঙ্গে।
মন মোর ধায় তারি মত্ত প্রবাহে
তাল-তমাল-অরণ্যে
ক্ষুব্ধ শাখার আন্দোলনে॥
हे गाणे मराठीत लिहूया..
मन मोर मेघेर संगी..
(मोर – माझे, संगी – सवंगडी )
उडे चले दिग दिगंते र पाने
निस्सीम शून्ये श्रावणवर्षण संगीते
रिमि झीम रिमिझीम रिमिझीम ..
मन मोर हंस ब ला का र पाखाय जाय उडे ..
(पाखाय – पंखावर..)
क्वचित क्वचित चकित तडित -आलोके ..
(तडि त आलोक – विद्युत )
झंझन मंजीर बा जाय झंन्ज रुद्र आनंदे ..
कलो कलो कल मंद्रे निरझरि नी ..
डाक देय प्रलय आहवाने ..
(डाक – हाक ..)
वायू बहे पुर्व समुद्र होतें ..
उच्छल छ लो छ लो तटिनी तरंगे ..
मन मोर धाय ता र मत्त प्रवाहें ..
(मोर – माझे, धाय -वाहून जाणे )
ताल तमाल अरण्ये ..
(ताल तमाल वृक्षांच्या अरण्यात…)
खुब्द शाखा र आंदोलने ..
(खुब्द – क्षुब्ध ..शाखा – फांद्या )
हेमंत कुमार ह्यांनी गायलेले हे गाणे..