हे आणखी एक लहान मुलांसाठी रचलेले गाणे… आता पाऊस संपत आलाय आणि दाटून आलेले ढग कमी होऊन सूर्याची किरणे डोकावू लागली आहेत..आणि शारदोत्सवाची सुट्टी सुरु होणार ह्या आनंदात सर्व जण हे गीत गात आहेत..
মেঘের কোলে রোদ হেসেছে, বাদল গেছে টুটি। আহা, হাহা, হা।
আজ আমাদের ছুটি ও ভাই, আজ আমাদের ছুটি। আহা, হাহা, হা।
কী করি আজ ভেবে না পাই, পথ হারিয়ে কোন্ বনে যাই,
কোন্ মাঠে যে ছুটে বেড়াই সকল ছেলে জুটি। আহা, হাহা, হা।
কেয়া-পাতার নৌকো গড়ে সাজিয়ে দেব ফুলে–
তালদিঘিতে ভাসিয়ে দেব, চলবে দুলে দুলে।
রাখাল ছেলের সঙ্গে ধেনু চরাব আজ বাজিয়ে বেণু,
মাখব গায়ে ফুলের রেণু চাঁপার বনে লুটি। আহা, হাহা, হা॥
हे गाणे मराठीत…
मेघेर कोले रोद हेशेछे, बादल गेछे टुटि .. आहा, हा हा , हा …
(ढगांच्या आडून हसताहेत सूर्य किरणे ….कोले – कुशीत ,रोद – ऊन ..)
आज आमादेर छुटि ओ भाई , आज आमादेर छुटि…आहा, हा हा , हा..
(आज आम्हाला सुट्टी..अरे भाई, आज आम्हाला सुट्टी..)
की कोरी आज भेबे ना पाई , पथ हारिये कोन बने जाई,
(काय करावे नाहीय सुचत…कुठल्या जंगलात हरवून जाऊ….)
कोन माठे जे छुटे बेडाई सकळ छेले जुटि..आहा, हा हा , हा…
(कुठल्या माळरानात खेळूया सर्व मुले मिळून...)
केया पातार नौको गडे साजिये देबो फुले —
(केवड्याची नौका बनवून सजवूया फुलांनी…केया पाता – केवडा ..)
ताल दिघि ते भाशिये देबो , चोलबे दुले दुले …
(तलावात देऊ ती सोडून जाईल डुलत डुलत….)
राखाल छेलेर संगे धेनू चराबो आज बाजिये वेणू ,
(गुराख्याबरोबर जाऊया आणि वाजवूया बासरी…)
माखबो गाये फुलेर रेणू चाम्पार बने लुटि …आहा, हा हा , हा
(चाफ्याच्या बागेत खेळत माखून घेऊ फुलांचा सुगंध...)
हे गाणे ऐकुया आशा भोसले ह्यांच्या आवाजात…