आज हि एक प्रार्थना ऐकुया.. ক্লান্তি আমার ক্ষমা করো প্রভু, পথে যদি পিছিয়ে পড়ি কভু॥ এই-যে হিয়া থরোথরো কাঁপে আজি এমনতরোএই বেদনা ক্ষমা…
इथे आता वसंत ऋतूची उधळण सुरु आहे. सर्वत्र आंब्याला मोहोर आलाय..जॅकरंडा बहरलाय..सोन्या सारखा पिवळा धमक wattle पण फुलून आलाय..रवींद्र नाथानी…
आज हे एक छोटेसे प्रेम गीत पाहूया.. তুমি রবে নীরবে হৃদয়ে মম নিবিড় নিভৃত পূর্ণিমানিশীথিনী-সম॥ মম জীবন যৌবন মম অখিল ভুবন …


