हि कविता रवींद्र नाथानी काश्मीर ची राजधानी श्रीनगर च्या वास्तव्यात रचली.. तिथल्या निसर्ग सौन्दर्याचे वर्णन ह्या कवितेत ते करताहेत..आणि ते…
हे आणखी एक पाऊस गाणे ऐकुया..हे एक बाउल गाणे आहे..ह्या गाण्यात रवींद्र नाथानी अशी कल्पना केली कि हे भरून आलेले…
इथे ह्या आठवड्यात पावसाची संततधार सुरु आहे..उन्हाळा असून हि पावसामुळे सगळी कडे हिरवे गार झाले आहे..अशा वेळी रवींद्र नाथाचे हे…
लहान मुलांना बांगला भाषा शिकवण्यासाठी रवींद्र नाथानी “सहज पाठ ” लिहिले..त्यात छोट्या छोट्या काव्यमय वाक्यातून बांगला वर्ण अक्षरे परिचित होतात..ह्या…
आज हे एक वर्षा गीत पाहूया… আজি শ্রাবণঘনগহন মোহে গোপন তব চরণ ফেলে নিশার মতো, নীরব ওহে, সবার দিঠি এড়ায়ে…
आज हे आणखी एक प्रार्थना गीत ऐकुया.. रवींद्र नाथाचे पुजा पर्जा येर गान … আগুনের পরশমণি ছোঁয়াও প্রাণে।এ জীবন পুণ্য…
आज हि एक प्रार्थना ऐकुया.. আনন্দলোকে মঙ্গলালোকে বিরাজ’, সত্যসুন্দর॥মহিমা তব উদ্ভাসিত মহাগগনমাঝে,বিশ্বজগত মণিভূষণ বেষ্টিত চরণে॥গ্রহতারক চন্দ্রতপন ব্যাকুল দ্রুত বেগেকরিছে পান,…
आज हि एक प्रार्थना ऐकुया.. প্রথম আদি তব শক্তি–আদি পরমোজ্জ্বল জ্যোতি তোমারি হে গগনে গগনে॥তোমার আদি বাণী বহিছে তব আনন্দ,জাগিছে নব…
रवींद्र नाथाच्या विसर्जन नाटकातले हे एक गीत… ह्या कवितेत कवी म्हणताहेत –कोण पूर्ण पणे सामावून घेईल मला? माझे काम, दुःख,…
इथे आता वसंत ऋतूची उधळण सुरु आहे.. विविध रंगाची फुले उमललीयेत..आंब्याला मोहोर आलाय…हे एक वसंत ऋतूचे गाणे आज ऐकुया.. ফাগুন-হাওয়ায়…








