अधरा माधुरी …

हे रवींद्र नाथानी रचलेले एक प्रेम गीत…. অধরা মাধুরী ধরেছি ছন্দোবন্ধনে।  ও যে   সুদূর প্রাতের পাখি    গাহে   সুদূর রাতের গান॥       বিগত বসন্তের…

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ए इ श्रावण बेला…

आज एक वर्षा गीत ऐकुया.. हे गाणे १९२५ मध्ये शांतिनिकेतन च्या वर्षा मंगल उत्सवात प्रथम गायिले गेले.. এই শ্রাবণ-বেলা বাদল-ঝরা  …

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हे खनिकेर अतिथी …

आज हे एक प्रेम गीत ऐकुया… হে ক্ষণিকের অতিথি,    এলে প্রভাতে কারে চাহিয়া        ঝরা শেফালির পথ বাহিয়া॥কোন্‌ অমরার বিরহিণীরে   চাহ নি ফিরে,    কার…

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प्रेम ए शे छिलो …

हे आणखी एक छोटेसे प्रेम गीत ऐकुया… প্রেম এসেছিল নিঃশব্দচরণে।তাই   স্বপ্ন মনে হল তারে–       দিই নি তাহারে আসন।বিদায়  নিল যবে, শব্দ…

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कतोबार भेबेछिनू ….

आज हे एक प्रेम गीत पाहूया… কতবার ভেবেছিনু আপনা ভুলিয়াতোমার চরণে দিব হৃদয় খুলিয়া।চরণে ধরিয়া তব কহিব প্রকাশিগোপনে তোমারে, সখা,…

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बहू युगेर ओ पार होते आषाढ ..

इथे गेले काही दिवस पाऊस पडतोय..रवींद्र नाथाचे हे एक वर्षा गीत पाहूया..हे गाणे १९२२ च्या वर्षा मंगल उत्सवात प्रथम गायले…

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आधेक घुमे नयन चुमे ….

रवींद्र नाथाचे हे एक गीत बरेच दिवस मनात घोळतेय..ह्या गाण्यात कवी आपल्या जोडीदारा सोबत व्यतीत केलेले निवांत क्षण वर्णन करताहेत……

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कार मिलन चाओ विरही …

आज रवींद्र नाथाचे पूजा परजायेर गान ऐकुया .. एक ब्रम्ह संगीत…ह्या कवितेत कवी आपल्या मनाला विचारतात कुणाच्या शोधात तू असा…

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शकालबेलार आलोय बाजे….

आज रवींद्र नाथाचे भैरवीच्या सुरात हे गाणे पाहूया….ह्या कवितेत ते म्हणतात..सकाळच्या ह्या सोनेरी प्रकाशात निरोपाचे करुण सूर वाजत आहेत..हे कवी,…

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