विदेशात फिरताना सगळ्या अनोळखी जागा मध्ये अचानक काही ओळखीचे सापडले कि खूप छान वाटते..स्वित्झर्लंड मध्ये आम्ही जिनेव्हा हुन झरमॅट ला…
आज हि एक प्रार्थना ऐकुया.. ক্লান্তি আমার ক্ষমা করো প্রভু, পথে যদি পিছিয়ে পড়ি কভু॥ এই-যে হিয়া থরোথরো কাঁপে আজি এমনতরোএই বেদনা ক্ষমা…
इथे आता वसंत ऋतूची उधळण सुरु आहे. सर्वत्र आंब्याला मोहोर आलाय..जॅकरंडा बहरलाय..सोन्या सारखा पिवळा धमक wattle पण फुलून आलाय..रवींद्र नाथानी…
आज हे एक छोटेसे प्रेम गीत पाहूया.. তুমি রবে নীরবে হৃদয়ে মম নিবিড় নিভৃত পূর্ণিমানিশীথিনী-সম॥ মম জীবন যৌবন মম অখিল ভুবন …
रवींद्र नाथाच्या शारदोत्सव नाटकातील हे एक शरद ऋतूचे वर्णन करणारे गीत… অমল ধবল পালে লেগেছে মন্দ মধুর হাওয়া দেখি নাই…
हे एक समूह गीत रवींद्र नाथाच्या “राजा” नाटकातील…कल्याण कारी, प्रजेला आवडणारा राजा कसा असावा हे ते ह्या गाण्यात सांगतात.. আমরা …
हे आणखी एक लहान मुलांसाठी रचलेले गाणे… आता पाऊस संपत आलाय आणि दाटून आलेले ढग कमी होऊन सूर्याची किरणे डोकावू…
हे आणखी एक लहान मुलांसाठी लिहिलेले गाणे… আয় তবে সহচরী, হাতে হাতে ধরি ধরিনাচিবি ঘিরি ঘিরি, গাহিবে গান।আন্ তবে বীণা–সপ্তম…
हि कविता रवींद्र नाथानी लहान मुलांसाठी लिहिलेय.. पावसाची कविता.. ती एका छडा वर बेतलेली आहे.. छडा म्हणजे बडबडगीत.. मूळ छडा…
बांगला काल गणने नुसार आज २२ श्रावण, रवींद्र नाथांचा मृत्यू दिन..हा दिवस “बाईशे श्राबोन” म्हणून पाळला जातो.. त्यांच्या स्मृतीला अभिवादन…









